{"_id":"6ad3c37b2941f01cdf130488","bookName":"वेदना : दार्शननक, आयुवेनदक और आधुननक पररप्रेक्ष्य","slug":"vedna-darshanik-ayurvedic-aur-aadhunik-pariprekshya","authors":[{"authorPhoto":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Neha.png","aboutAuthor":"नेहा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के संज्ञाहरण विभाग में योग विषय से पीएचडी कर रही हैं। लेखिका अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ की सदस्यता के तौर पर अम्बेडकर नगर प्रान्त की अध्यक्षता (2019-2021) देखी है, और 2023 से भारतीय योग संघ की सदस्यता प्राप्त की है । जो मानवता की सेवा और समाज के सभी वर्गों के सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक उत्थान को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।  उन्होंने डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से गणित व भौतिकी में स्नातक और योग विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की साथ ही जून 2020 -दिसंबर 2021  में  यूजीसी-नेट भी उत्तीर्ण किया है। 2020 में एक्यूप्रेशर शोध प्रशिक्षण एवं उपचार संस्थान, प्रयागराज से एक्यूप्रेशर की पढ़ाई की। नेहा ने 10 से अधिक शोध लेख, 2 अध्याय व 1 पुस्तक प्रकाशित किया हैं और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आठ पत्र प्रस्तुत किए हैं साथ ही 2 से अधिक शोध पत्रों की समीक्षा भी की है । उनका शोध योग व आयुर्वेद पद्धत्ति द्वारा दर्द प्रबंधन और उपशामक देखभाल को एकीकृत करने पर केंद्रित है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने वाले समग्र दृष्टिकोणों की खोज भी करता है। इन्होंने अखिल भारतीय प्रसार भारती रेडियो स्टेशन (अयोध्या) में 2019 -2022 तक काम किया है, और इन्होने अस्पताल, स्कूल, व आश्रमों में भी समय-समय पर कैम्प आदि द्वारा योग प्रचारक, योग प्रशिक्षक के तौर पर 2018- 2025 तक निरंतर योग के क्षेत्र में ईमानदारी और निष्ठा से सेवा देते रही हैं । 2023 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर से पर्वतारोहण की भी पढ़ाई की हैं ।","authorName":"नेहा"},{"authorPhoto":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Dr. Vishal Jaiswal.png","aboutAuthor":"डॉ. विशाल जायसवाल 17 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ प्राकृतिक चिकित्सा, प्राणिक उपचार और योग के विशेषज्ञ हैं। ओम् श्री काया कल्पम नामक योग व् प्राकृतिक चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र के संचालक हैं। वह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बीमारियों, योग, ध्यान और अनुप्रयुक्त शरीर रचना विज्ञान और शरीर क्रिया विज्ञान के परामर्श में माहिर हैं। 2002 से 2007 तक, उन्होंने VIPST संस्थान, वाराणसी में एक शिक्षक और व्याख्याता के रूप में कार्य किया। 2009 से, वह वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग फाउण्डेशन, मनीला, फिलीपींस के साथ योग विद्या प्राणिक हीलिंग पाठ्यक्रमों के लिए एक अधिकृत प्रशिक्षक रहे हैं और 15 वर्षों से योग एवं प्राणिक हीलिंग सिखा रहे हैं। विशाल जायसवाल, आयुर्वेद संकाय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी से योग और प्राकृतिक चिकित्सा में पीएचडी कर चुके हैं। उन्होंने जुलाई 2018 में NET (योग) पास किया और फरवरी 2018 में QCI द्वारा प्रमाणित एक योग्य योग पेशेवर परीक्षक रहे हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में वीबीएस पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से प्राणि विज्ञान और रसायन विज्ञान में बीएससी एवं वी एम विश्वविद्यालय, सालेम से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में एमएससी शामिल है। उन्होंने लगभग 45 राष्ट्रीय और 10 अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों और सम्मेलनों में भाग लिया है। उनकी उपलब्धियों में ग्लोबल टच इंटरनेशनल, लखनऊ से \"युवा रत्न\" पुरस्कार और रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ आजीवन सदस्यता शामिल है। वे भारत विकास परिषद और जेसीआई के सक्रिय सदस्य रहे हैं और मानव उपचार एवं स्वास्थ्य समिति, वाराणसी के सचिव और राष्ट्रीय मानवाधिकार न्याय आयोग के राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। डॉ. विशाल की 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं एवं उनके शोध कार्य स्कोपस-इंडेक्स्ड और यूजीसी केयर लिस्टेड पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, डॉ. विशाल ने पुस्तकों में 5 अध्याय तथा विभिन्न चिकित्सा पत्रिकाओं में 15 शोध लेख लिखे हैं।","authorName":"डॉ. विशाल जायसवाल"},{"authorPhoto":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Dr. Rakesh Kumar Jaiswal.png","aboutAuthor":"डॉ. राकेश कुमार जायसवाल का जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में हुआ, उनके पिता स्वर्गीय विद्यासागर जायसवाल एक व्यापारी थे। माता स्वर्गीय कैलाशपत्ती जायसवाल एक कुशल गृहणी थी। डॉ० राकेश कुमार जायसवाल ने हाई स्कूल एवं इंटर, होवर्ट इंटर कॉलेज टांडा, टांडा अंबेडकर नगर से किया, तत्पश्चात बीएससी प्रसिद्ध लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ से किया इसके पश्चात बी.ए. एम.एस. राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज इंडिया प्रयागराज से एवं एम एस (संज्ञाहरण) एवं पीएचडी (शल्य तंत्र) काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से किया। पीएचडी के साथ-साथ पार्ट टाइम \"डिप्लोमा इन योग \" की उपाधि भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्राप्त किया। डॉ. राकेश कुमार जायसवाल ने सर सुंदरलाल अस्पताल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 2003 में सर्विस सीनियर रेजिडेंट, 2005 में मेडिकल ऑफिसर, 2009 में सीनियर मेडिकल ऑफिसर, 2014 में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं 2015 में आयुर्वेद संकाय के संज्ञाहरण विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पर नियुक्त हुए, इसी दौरान 2009 से 2015 तक सर सुंदरलाल अस्पताल के आयुर्वेदिक विंग में उप चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस समय डॉ. राकेश कुमार जायसवाल भारतीय संज्ञाहारक एसोसिएशन (भारत) के महासचिव एवं संज्ञाहारक एसोसिएशन उत्तर प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष है। इन्होंने 12 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में 70 शोध पत्र एवं आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 40 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, इसके अलावा लेखक ने एक पुस्तक एवं नौ पुस्तकों में विभिन्न विषयों पर अपना अध्याय लिखकर योगदान किया है। इसके अलावा लेखक अंतरराष्ट्रीय चैरिटी संस्था रोटरी क्लव, वाराणसी नॉर्थ के अध्यक्ष पद पर एवं इस संस्था में विभिन्न पदो पर भी कार्य कर चुके हैं।","authorName":"डॉ. राकेश कुमार जायसवाल"},{"authorPhoto":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Dr. Sarita meena.png","aboutAuthor":"डॉ सरिता मीना को 10 वर्षों का अनुभव वेदनाहर चिकित्सा में है, उन्होंने बी.ए.एम.एस. राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से 2014 में पूर्ण किया और स्नातकोत्तर 2018 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सम्पूर्ण किया एवं 2021 में अनुसंधान कार्य (पीएच.डी.) सम्पूर्ण किया तत्‌पश्चात 2021 से 2025 तक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत रही। वह अनुसंधान कार्य में अत्यंत रुचि रखती हैं, वह 3 स्नाकोत्तर छात्रों की Co-Guide भी रह चुकी हैं। सरिता मीना ने 7 Research paper publish किये है, उन्होंने लगभग २० राष्ट्रीय एवं 8 अंतराष्ट्रीय संगोष्ठीयो एवं सम्मेलनों में भाग लिया। उनको मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, जलौका अवचारण चिकित्सा विधि में विशेष अनुभव है।","authorName":"डॉ सरिता मीना"},{"authorPhoto":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Mohit Kumar.png","aboutAuthor":"मोहित कुमार योग एवं मनोविज्ञान के क्षेत्र में संलग्न, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक समर्पित शोधार्थी हैं, जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि योग, भारतीय इतिहास संस्कृति एवं मनोविज्ञान से गहराई से जुड़ी है। इन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण अनुभव अर्जित करते हुए अनुसंधान पद्धति में सुदृढ़ दक्षता विकसित की है। इनके शोध कार्य का केंद्र बिंदु शल्य-पूर्व मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं में योगिक हस्तक्षेपों की भूमिका एवं उनकी प्रभावशीलता का विश्लेषण है, जिसमें मानवीय तनाव, अनुकूलन एवं मानसिक संतुलन के आयामों का सूक्ष्म अध्ययन निहित है। इनके अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर योग के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को प्रमाणित करना है।","authorName":"मोहित कुमार"}],"bookDescription":"\"यह पुस्तक वेदना (दर्द) के स्वरूप, कारण और प्रबंधन का भारतीय दर्शन, आयुर्वेद तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आलोक में एक समग्र, तुलनात्मक और शोधपरक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।\"","bookRating":5,"bookFormat":"Paperback and E-book","pages":181,"ISBNNo":"978-93-47456-12-1","aboutBook":"\"वेदना : दार्शनिक, आयुर्वेदिक और आधुनिक परिप्रेक्ष्य\" एक विशिष्ट एवं बहुआयामी ग्रंथ है, जिसमें वेदना (Pain) की अवधारणा का भारतीय दार्शनिक चिंतन, आयुर्वेदिक सिद्धांतों तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आलोक में समग्र एवं तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। वेदना मानव जीवन की एक सार्वभौमिक अनुभूति है, जो केवल शारीरिक पीड़ा तक सीमित न होकर मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों को भी प्रभावित करती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पुस्तक में वेदना के स्वरूप, कारण, रोगजनन, वर्गीकरण, निदान एवं प्रबंधन के विविध पक्षों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विवेचन किया गया है।<br><br.>\r\nपुस्तक के प्रारंभिक अध्यायों में भारतीय दर्शन की विभिन्न परम्पराओं में वेदना की अवधारणा, उसके अस्तित्वगत एवं आध्यात्मिक आयामों का वर्णन किया गया है। इसके पश्चात आयुर्वेद में वेदना की उत्पत्ति, दोष-दूष्य संबंध, वात की भूमिका तथा वेदना निवारण के सिद्धांतों एवं उपचारात्मक उपायों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में दर्द की न्यूरोफिजियोलॉजी, दर्द संप्रेषण तंत्र, दर्द के प्रकार, मूल्यांकन एवं आधुनिक दर्द प्रबंधन पद्धतियों का भी सुव्यवस्थित वर्णन किया गया है।<br><br.>\r\nयह ग्रंथ प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मध्य एक सार्थक सेतु स्थापित करता है। सरल भाषा, प्रमाणिक संदर्भों एवं शोधपरक प्रस्तुति के कारण यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों, आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े सभी पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी। वेदना के समग्र अध्ययन एवं समझ के लिए यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में अपना विशिष्ट स्थान स्थापित करने की क्षमता रखती है।","price":1000,"sellingPrice":1000,"DOIDetail":"doi","bookGallery":["/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_Gallery2.png"],"bookSales":0,"bookRoyalty":0,"bookBy":["66ada297d95098bca5841d28","6945a10b2adce3452b18ccb6"],"category":"695eb882b0659e48a719bb40","bookGenre":[],"show":true,"date_time":"2026-10-15T22:57:07.990Z","bookCover":"/uploads/PublishedBook/Vedna Darshanik, Ayurvedic aur Aadhunik Pariprekshya_cover.png","__v":0}